Thursday, 28 January 2021

यह पर्बतों के दायरे यह शाम का धुआँ....वासना (1968)

    वासना (1968)

    बैनर : अनुरिता आर्ट
    निर्माता : मदन मोहला
    निर्देशक : प्रकाश राव
    संगीतकार : चित्र गुप्त
    गीतकार : साहिर लुधियानवी
    फिल्मांकन : विश्वजीत, कुमुद छुगानी
    सह - गायक/गायिका : लता मंगेशकर

    गीत (HMV Label-55592)

रफ़ी-यह पर्बतों के दायरे यह शाम का धुआँ, 
ऐसे में क्यों न छेड़ दें दिलों की दास्ताँ,
लता-यह पर्बतों के दायरे यह शाम का धुआँ, 
ऐसे में क्यों न छेड़ दें दिलों की दास्ताँ,
रफ़ी, लता-यह पर्बतों के दायरे यह शाम का धुआँ........
...
रफ़ी-ज़रा सी ज़ुल्फ़ खोल दो फ़िज़ा में इत्र घोल दो-2
नज़र जो बात कह चुकी वो बात मुंह से बोल दो,
के झूम उठे निगाह में बहार का समां,
रफ़ी, लता-यह पर्बतों के दायरे यह शाम का धुआँ......
...
लता-यह चुप भी एक सवाल है, अजीब दिल का हाल है- 2
हर एक ख्याल खो गया, बस अब यहि ख्याल है,
के फासला न कुछ रहे हमारे दरमियान,
रफ़ी, लता-यह पर्बतों के दायरे यह शाम का धुआँ......
...
रफ़ी-यह रूप रंग यह फबन चमकते चाँद सा बदन-2
बुरा न मानो तुम अगर तो चूम लून किरण किरण,
के आज हौसलों में है बला की गर्मियां,
रफ़ी, लता-यह पर्बतों के दायरे यह शाम का धुआँ,
ऐसे में क्यों न छेड़ दें दिलों की दास्ताँ

यह पर्बतों के दायरे यह शाम का धुआँ......


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